Gulzar shayari in hindi, Gulzar quotes in hindi, Gulzar poem in hindi, Gulzar poetry in hindi, गुलज़ार शायरी इन हिंदी, गुलजार की दो लाइन शायरी


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यहां पर गुलज़ार साहब की शायरी को गुलज़ार की दो लाइन शायरी के रूप में लिखा गया है।


Gulzar books -: Selected Poemsरात पश्मीने की, दो लोगपुखराज


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Gulzar shayari in hindi / Gulzar quotes in hindi ( गुलज़ार शायरी इन हिंदी ) -: 



~ क़िताबें माँगने, गिरने, उठाने के बहाने जो रिश्ते बनते थे
   अब उनका क्या होगा, वो शायद अब नही होंगे ।।



~ नाम होते हैं रिश्तों के
   कुछ रिश्ते नाम के होते हैं ।



~ मैं किस वतन की तलाश में यूँ चला था घर से
   कि अपने घर में भी अजनबी हो गया हूँ आ कर ।



~ अब ना माँगेंगे जिन्दगी या रब
   ये गुनाह हम ने एक बार किया ।



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~ मुझे ऐसे मरना है,
   जैसे लिखते-लिखते स्याही ख़त्म हो जाए ।



~ हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
   वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते ।।



~ बड़ी हसरत है पूरा एक दिन इक बार मैं
   अपने लिए रख लूं,
   तुम्हारे साथ पूरा एक दिन
   बस खर्च करने की तमन्ना है ।।



~ ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है
   उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी ।।



~ कभी तो चौंक कर देखे कोई हमारी तरफ
   किसी की आँख मे हमको भी इंतज़ार दिखे ।।



~ सिर्फ आवाज देने से ही कारवां नहीं रुका करते
   देखा ये भी जाता है कि पुकारा किसने है ।।



~ प्यार न कभी इकतरफ़ा होता है न होगा
   दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये ।।




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~ ये शर्म है या हया है, क्या है, नज़र उठाते ही झुक गयी है
   तुम्हारी पलकों से गिरती शबनम हमारी आंखों में रुक गयी है ।



~ जिन्दगी की दौड़ में, तजुर्बा कच्चा ही रह गया ।
   हम सीख न पाये 'फरेब', और दिल बच्चा ही रह गया ।।



~ मुस्कुराने से शुरू और रुलाने पर खत्म
   ये वो जुर्म हैं जिसे लोग मोहब्बत कहतें हैं ।



~ अगर आँसुओ की किम्मत होती
   तो कल रात का तकिया अरबों का होता ।।



~ जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में
    दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में ।।



~ वो एक दिन एक अजनबी को, मेरी कहानी सुना रहा था 
   वो उम्र कम कर रहा था मेरी, मैं साल अपने बढ़ा रहा था ।




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~ तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में
   तुझे ही वक्त नहीं दे पा रहे हम
   माफ़ करना ऐ ज़िंदगी
   तुझे ही नहीं जी पा रहे हम ।।



~ जिस की आँखों में कटी थी सदियाँ
   उस ने सदियों की जुदाई दी है ।।



~ कब से बैठा हुआ हूँ मैं जानम
   सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा
   बस तेरा नाम ही मुकम्मल है
   इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी ।।



~ प्यार अकेला नहीं जी सकता
   जीता है तो दो लोगों में
   मरता है तो दो मरते हैं।



~ तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी
   मगर हम खांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है।



~ आओ ज़बानें बाँट लें अब अपनी अपनी हम
    न तुम सुनोगे बात, ना हमको समझना है ।।



~ जीवन से लंबे हैं बंधु, ये जीवन के रस्ते
   एक पल थम के रोना होगा, एक पल चलना हँस के ।



~ उसे ये ज़िद है कि मैं पुकारूँ
   मुझे तक़ाज़ा है वो बुला ले ।।



~ एक उम्मीद बार बार आ कर, अपने टुकड़े तलाश करती है
   बूढ़ी पगडंडी शहर तक आ कर, अपने बेटे तलाश करती है।।



~ शाम से आँख में नमी सी है
   आज फिर आप की कमी सी है ।



~ आदतन तुम ने कर दिये वादे
   आदतन हम ने ऐतबार किया ।




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~ अब ज़रा सी भर गई हो तुम
    ये वजन तुम पर अच्छा लगता है ।



~ वो कटी फटी हुई पत्तियां, और दाग़ हल्का हरा हरा
   वो रखा हुआ था किताब में, मुझे याद है वो ज़रा ज़रा ।।



~ तेरा चेहरा ही लिये घूमता हूँ, शहर में तबसे
   लोग मेरा नहीं, एहवाल तेरा पूछते हैं, मुझ से ।।



~ जैसे कहीं रख के भूल गए हों,
   बेफिक्र वक्त अब मिलता ही नही ।।



~ कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे हैं
   क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है ।।



~ किताबें झाँकती हैं 
   बंद अलमारी के शीशों से
   बड़ी हसरत से तकती हैं
   महीनों अब मुलाक़ातें नही होती ।।



~ वो आके पेहलू में ऐसे बैठे, के शाम रंगीन हो गयी है
   ज़रा ज़रा सी खिली तबियत, ज़रा सी ग़मगीन हो गयी है ।



~ आईना देख के तसल्ली हुई
   हम को इस घर में जानता है कोई ।



~ चंद उम्मीदें निचोड़ी थीं तो आहें टपकीं
   दिल को पिघलाएँ तो हो सकता है साँसें निकलें ।।



~ एक कमीज़ अब कितने दिन कोई पहनेगा
   कॉलर मैले,आस्तीन उधड़ी-उधड़ी
   नया कोई मज़हब आये तो कपड़े बदलूँ ।



~ कब आते हो कब जाते हो
   दिन में कितनी-कितनी बार मुझको - तुम याद आते हो ।



~ काश इक बार कभी नींद से उठकर तुम भी
   हिज्र की रातों में ये देखो तो क्या होता है ।




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~ जब मैं छोटा था
   शायद शामें बहुत लंबी हुआ करती थी
   अब शाम नहीं होती,
   दिन ढलता है और सीधे रात हो जाती है
   शायद वक़्त सिमट रहा है ।



~ आधे पौने पुरे चांद 
   जितना था सब माल गया , 
   बारह महीने जमा किए थे 
   जेब काटकर साल गया ।



~ तब मैं जानबूझकर हार जाया करता था
   अब चाह कर भी जीत नहीं पाता हूँ तुमसे,
   पता नहीं कौन सी चाल पर
   देखते ही देखते मैं मात खा जाऊँ
   ये डर तो लगता है ज़रूर,
   पर मैं ख़ुश हूँ कि तुम खेलना सीख गये ।



~ छोटी-छोटी बातों की हैं यादें बड़ी,
   भूले नहीं,बीती हुई एक छोटी घड़ी ।



~ चलो अच्छा हुआ
   जो तुम मेरे दर पे नहीं आए,
   तुम झुकते नहीं
   और मै चौखटें ऊंची कर नही पाता ।।



~ ज़ुबान पर ज़ाएका आता था जो सफ़हे पलटने का
   अब उँगली ‘क्लिक’ करने से बस इक
   झपकी गुज़रती है ।




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~ याद है इक दिन
   मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे
   सिगरेट की डिबिया पर तुमने
   एक स्केच बनाया था
   आकर देखो
   उस पौधे पर फूल आया है ।



~ खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
   एक पुराना खत खोला अनजाने में ।



~ वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर
   इस की आदत भी आदमी सी है ।



~ खुले दरीचे के पीछे दो आँखें झाँकती हैं
   अभी मेरे इंतज़ार में वो भी जागती हैं ।



~ तेरी राहों में हर बार रुक कर
   हम ने अपना ही इन्तज़ार किया ।



~ जंगल जंगल बात चली है पता चला है
   अरे चड्डी पहन के फूल खिला है फूल खिला है ।



~ कोई वादा नहीं किया लेकिन
   क्यों तेरा इंतजार रहता है
   बेवजह जब क़रार मिल जाए
   दिल बड़ा बेकरार रहता है


~ बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद को इस ज़मीन से
   यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है।।


~ इतना क्यों सिखाये जा रही है ज़िन्दगी
   हमें कौन सी सदियाँ गुज़ारनी है यहाँ।।


~ अपने साये से चौंक जाते हैं
   उम्र गुजरी है इस क़दर तनहा।।


~ दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले
   नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है।।


~ उसी का इमान बदल गया है
   कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था।।


~ तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी
   मगर हम खांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है।।


~ मौत की शह देकर तुमने समझा था अब
   तो मात हुई
   मैने जिस्म का खोल उतारकर सौंप
   दिया, और रूह बचा ली।।



Umeed hai ki aap ko Gulzar quotes in hindi, Gulzar shayari in hindi pasand aayi hongi. Hamane unki kai prashidh rachnaon mein se unke mahatvpoorn anshon ko Gulzar ki do line shayari ke roop mein yahan prastut kiya hai. 

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