हरिशंकर परसाई के विचार, harishankar parsai quotes in hindi, harishankar parasai vyang in hindi, हरिशंकर परसाई के व्यंग्य संग्रह

 

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harishankar parsai ji bharat ke ek mahan vyangkar hue hain. rajniti aur samajh par inke vyang ek kataksh ki tarah kaam karte hain. aaj ka yuva harishankar parsai vyang ko bahut pasand karte hain. aur system ka virodh karne ke liye harishankar parsai ke vyang ka istemaal karte hain.


Harishankar Parsai Books -: निठल्ले की डायरीआवारा भीड़ के खतरे, ठिठुरता हुआ गणतंत्रविकलांग श्रद्धा का दौर


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Famous Harishankar Parsai quotes in hindi हरिशंकर परसाई के व्यंग्य -:


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~ सबसे बड़ी मूर्खता है - इस विश्वास से लबालब भरे रहना कि लोग हमें वही मान रहे हैं, जो हम उन्हें मनवाना चाहते हैं।


~ लड़कों को, ईमानदार बाप निकम्मा लगता है।


~ इस पृथ्वी पर जनता की उपयोगिता कुल इतनी है कि उसके वोट से मंत्रिमंडल बनते हैं।


~ दिवस कमजोर का मनाया जाता है, जैसे महिला दिवस, अध्यापक दिवस, मजदूर दिवस। कभी थानेदार दिवस नहीं मनाया जाता।


~ नारी-मुक्ति के इतिहास में यह वाक्य अमर रहेगा कि - ‘एक की कमाई से पूरा नहीं पड़ता।'


~ सबसे निरर्थक आंदोलन भ्रष्टाचार के विरोध का आंदोलन होता है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से कोई नहीं डरता। एक प्रकार का यह मनोरंजन है जो राजनीतिक पार्टी कभी-कभी खेल लेती है, जैसे कबड्डी का मैच। 


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~ प्रजातंत्र में सबसे बड़ा दोष तो यह है कि उसमें योग्यता को मान्यता नहीं मिलती, लोकप्रियता को मिलती है। हाथ गिने जाते हैं, सर नहीं तौले जाते। 


~ झूठ बोलने के लिए सबसे सुरक्षित जगह अदालत है।


~ साल-भर सांप दिखे तो उसे भगाते हैं। मारते हैं। मगर नागपंचमी को सांप की तलाश होती है, दूध पिलाने और पूजा करने के लिए। सांप की तरह ही शिक्षक दिवस पर रिटायर्ड शिक्षक की तलाश होती है, सम्मान करने के लिए।


~ आत्मविश्वास कई प्रकार का होता है, धन का, बल का, ज्ञान का। लेकिन मूर्खता का आत्मविश्वास सर्वोपरि होता है।


~ चाहे कोई दार्शनिक बने. साधु बने या मौलाना बने. अगर वो लोगों को अंधेरे का डर दिखाता है, तो ज़रूर वो अपनी कंपनी का टॉर्च बेचना चाहता है।


~ नशे के मामले में हम बहुत ऊँचे हैं. दो नशे खास हैं- हीनता का नशा और उच्चता का नशा. जो बारी-बारी से चढ़ते रहते हैं।


~ धार्मिक उन्माद पैदा करना, अंधविश्वास फैलाना, लोगों को अज्ञानी और क्रूर बनाना; राजसत्ता, धर्मसत्ता और पुरुष सत्ता का पुराना हथकंडा है |


~ हम मानसिक रूप से दोगले नहीं तिगले हैं। संस्कारों से सामन्तवादी हैं, जीवन मूल्य अर्द्ध-पूँजीवादी हैं और बातें समाजवाद की करते हैं।


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~ निंदकों को दंड देने की जरूरत नहीं, खुद ही दंडित है। आप चैन से सोइए और वह जलन के कारण सो नहीं पाता।


~ 'जूते खा गए' अजब मुहावरा है। जूते तो मारे जाते हैं। वे खाए कैसे जाते हैं? मगर भारतवासी इतना भुखमरा है कि जूते भी खा जाता है।


~ हमारे देश में सबसे आसान काम आदर्शवाद बघारना है और फिर घटिया से घटिया उपयोगितावादी की तरह व्यवहार करना है। 


~ सत्य को भी प्रचार चाहिए, अन्यथा वह मिथ्या मान लिया जाता है।


~ जो पानी छानकर पीते हैं, वो आदमी का खून बिना छाने पी जाते हैं।


~ बाज़ार बढ़ रहा है , इस सड़क पर किताबों की एक नयी दुकान खुली है और दवाओं की दो। ज्ञान और बीमारी का यही अनुपात है हमारे शहर में।


~ पुरुष रोता नहीं है पर जब वो रोता है, रोम-रोम से रोता है। उसकी व्यथा पत्थर में दरार कर सकती है।


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~ एक देश है! गणतंत्र है! समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है!


~ धर्म अच्छे को डरपोक और बुरे को निडर बनाता है।


~ बच्चा, ये कोई अचरच की बात नहीं है। हमारे यहाँ जिसकी पूजा की जाती है उसकी दुर्दशा कर डालते हैं। यही सच्ची पूजा है। नारी को भी हमने पूज्य माना और उसकी जैसी दुर्दशा की सो तुम जानते ही हो। 


~ दुनिया में भाषा, अभिव्यक्ति के काम आती है। इस देश में दंगे के काम आती है।


~ सरकार का विरोध करना भी सरकार से लाभ लेने और उससे संरक्षण प्राप्त करने की एक तरकीब है। 


~ देश की आधी ताकत लड़कियों की शादी करने मे जा रही है। पाव ताकत छिपाने मे जा रही है, शराब पीकर छिपाने में, प्रेम करके छिपाने में, घूस लेकर छिपाने में, बची पाव ताकत से देश का निर्माण हो रहा है, तो जितना हो रहा है, बहुत हो रहा है। आख़िर एक चौथाई ताकत से कितना होगा।


~ इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं पर वे सियारों की बारात में बैंड बजाते हैं।


~ बेइज्जती में अगर दूसरे को भी शामिल कर लो तो आधी इज्जत बच जाती है।


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~ राजनीतिज्ञों के लिए हम नारे और वोट हैं, बाकी के लिए हम गरीब, भूख, महामारी और बेकारी हैं। मुख्यमंत्रियों के लिए हम सिरदर्द हैं और उनकी पुलिस के लिए हम गोली दागने के निशाने हैं।


~ राजनीति में शर्म केवल मूर्खों को ही आती है।


~ अब करना यह चाहिए। रोज़ विधानसभा के बाहर एक बोर्ड पर 'आज का बाजार भाव' लिखा रहे। साथ ही उन विधायकों की सूची चिपकी रहे जो बिकने को तैयार हैं। इससे ख़रीददार को भी सुविधा होगी और माल को भी।


~ धन उधार देकर समाज का शोषण करने वाले धनपति को जिस दिन "महाजन" कहा गया होगा, उस दिन ही मनुष्यता की हार हो गई ।


~ पुस्तक लिखनेवाले से बेचनेवाला बड़ा होता है। कथा लिखनेवाले से कथावाचक बड़ा होता है। सृष्टि निर्माता से सृष्टि को लूटनेवाला बड़ा होता है।


~ विचार जब लुप्त हो जाता है, या विचार प्रकट करने में बाधा होती है, या किसी के विरोध से भय लगने लगता है। तब तर्क का स्थान हुल्लड़ या गुंडागर्दी ले लेती है।


~ ग़रीबों के साथ धोखों का अविष्कार करने के मामले में अपना देश बहुत आगे है।


~ राजनीति में, साहित्य में, कला में, धर्म में, शिक्षा में। अंधे बैठे हैं और आँखवाले उन्हें ढो रहे हैं।


~ एक बार कचहरी चढ़ जाने के बाद सबसे बड़ा काम है, अपने ही वकील से अपनी रक्षा करना।


~ व्यस्त आदमी को अपना काम करने में जितनी अक्ल की ज़रूरत पड़ती है, उससे ज़्यादा अक्ल बेकार आदमी को समय काटने में लगती है।


~ जिसकी बात के एक से अधिक अर्थ निकलें, वह संत नहीं होता, लुच्चा आदमी होता है। संत की बात सीधी और स्पष्ट होती है और उसका एक ही अर्थ निकलता है।


~ तारीफ़ करके आदमी से कोई भी बेवकूफ़ी करायी जा सकती है।


~ मुझे यह शिकायत है कि जिसने अश्रुगैस में देश को आत्मनिर्भर बना दिया उसे शांति का नोबेल पुरस्कार क्यों नहीं मिला।


आदमी की पहली आवश्यकता अन्न नहीं, वस्त्र है। आदमी एक दिन भूखा रह सकता है पर नंगा नहीं रह सकता।


व्यभिचार से जाति नहीं जाती है; शादी से जाती है।


~ गाली वही दे सकता है, जो रोटी खाता है। पैसा खाने वाला सबसे डरता है।


हर आदमी बेईमानी की तलाश में है। और हर आदमी चिल्लाता है, बड़ी बेईमानी है


~ अंधभक्त होने के लिए प्रचंड मूर्ख होना अनिवार्य शर्त है।


~ बलात्कार को पाशविक कहा जाता है, पर यह पशु की तौहीन है, पशु बलात्कार नहीं करते। सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।


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