Munshi Premchand quotes in hindi, मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार और वचन, Munshi Premchand thoughts in hindi, Quotes of Munshi Premchand in hindi



Motivational thoughts in hindi par aaj hum padhenge मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार और वचन, Munshi Premchand quotes in hindi. jo ki Munshi Premchand stories me se liye gye hain. Munshi Premchand ji bhartiya sahitya itihaas ke ek mahan lekhak rhe hain. inhone urdu aur hindi dono hi bhasha me apni mahan rachnaien desh ko di hain. Munshi Premchand ki kahaniyan bhartiya samajh ek darpan hain. inhi Munshi Premchand stories me se aapke liye famous quotes of munshi premchan in hindi likhe gye hain.

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Famous Munshi premchand quotes in hindi मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार और वचन -:



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~ क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात कहने के बजाय दूसरों के ह्रदय को ज़्यादा दुखाता है।


~ अंधी प्रशंसा अपने पात्र को घमंडी और अंधी भक्ति धूर्त बनाती है।


~ भरोसा प्यार करने के लिए पहला कदम है।


~ संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए गढ़ी है।


~ संसार में गऊ बनने से काम नहीं चलता, जितना दबो, उतना ही दबाते हैं।


~ बूढ़ों के लिए अतीत के सुखों और वर्तमान के दुःखों और भविष्य के सर्वनाश से ज्यादा मनोरंजक और कोई प्रसंग नहीं होता।


~ जब किसान के बेटे को गोबर में से बदबू आने लग जाए तो समझ लो कि देश में अकाल पड़ने वाला है।


~ साक्षरता अच्छी चीज है और उससे जीवन की कुछ समस्याएं हल हो जाती है। लेकिन यह समझना कि किसान निरा मुर्ख है, उसके साथ अन्याय करना है।


~ यह कितनी अनोखी लेकिन यथार्थ बात है कि सोये हुए मनुष्य को जगाने की अपेक्षा जागते हुए मनुष्य को जगाना कठिन है।


~ सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रहते हैं।


~ कुल की प्रतिष्ठा सदव्यवहार और विनम्रता से होती है, हेकड़ी और रौब दिखाने से नहीं।


~ क़ानून और हक़-ओ-इंसाफ़ ये सब दौलत के खिलौने हैं।


~ आत्मसम्मान की रक्षा हमारा सबसे पहला धर्म और अधिकार है।


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~ दुनिया में विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई भी विद्यालय आज तक नहीं खुला है।


~ न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसे चाहती है, नचाती है।


~ सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है।


~ अमीरी की कब्र पर उगी गरीबी बड़ी जहरीली होती है।


~ मन एक डरपोक शत्रु है जो हमेशा पीठ के पीछे से वार करता है।


~ जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या बेकार है।


~ लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन है, विचार है! जिन्होंने धन और भोग-विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया, वह क्या लिखेंगे?


~ अन्याय होने पर चुप रहना, अन्याय करने के ही समान है।


~ धर्म की कसौटी मानवता है। जिस धर्म में मानवता को प्रधानता दी गयी है, बस उसी धर्म का मैं दास हूँ। कोई देवता हो, नबी या पैगंबर, अगर वह मानवता के विरुद्ध है तो उसे मेरा दूर से ही सलाम है।


~ जिस बंदे को दिन की पेट भर रोटी नहीं मिलती, उसके लिए इज्‍जत और मर्यादा सब ढोंग है।


~ चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुंचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी न जाएं।


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~ कोई अन्याय केवल इसलिए मान्य नहीं हो सकता कि लोग उसे परम्परा से सहते आये हैं।


~ राष्‍ट्र के सामने जो समस्याएँ हैं, उनका सम्बन्ध हिन्‍दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई सभी से है। बेकारी से सभी दुखी हैं। दरिद्रता सभी का गला दबाये हुए है। नित नयी-नयी बीमारियाँ पैदा होती जा रही हैं। उसका वार सभी सम्‍प्रदायों पर समान रूप से होता है। 


~ देश का उद्धार विलासियों द्वारा नहीं हो सकता। उसके लिए सच्चा त्यागी होना पड़ेगा।


~ प्रेम की रोटियों में अमृत रहता है, चाहे वह गेहूं की हों या बाजरे की।


~ इंसान सब हैं पर, इंसानियत विरलों में मिलती है।


~ सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है।


~ आकाश में उड़ने वाले पंछी को भी अपना घर याद आता है।


~ मै एक मज़दूर हूँ। जिस दिन कुछ लिख न लूँ, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं।


~ मोहब्बत रूह की ख़ुराक है, यह वह अमृत है जो मरे हुए भावों को ज़िंदा कर देती है।


~ विजयी व्यक्ति स्वभाव से बहिर्मुखी होता है। पराजय व्यक्ति को अन्तर्मुखी बनाती है।


~ अब सब जने खड़े क्या पछता रहे हो। देख ली अपनी दुर्दशा, या अभी कुछ बाकी है। आज तुमने देख लिया न कि हमारे ऊपर कानून से नहीं, लाठी से राज हो रहा है। आज हम इतने बेशरम हैं कि इतनी दुर्दशा होने पर भी कुछ नहीं बोलते।


~ हमारे यहाँ विवाह का आधार प्रेम और इच्छा पर नहीं, धर्म और कर्तव्य पर रखा गया है। इच्छा चंचल है, क्षण-क्षण में बदलती रहती है। कर्तव्य स्थायी है, उसमें कभी परिवर्तन नहीं होता।


~ क्रोध अत्यंत कठोर होता है। वह देखना चाहता है कि मेरा एक-एक वाक्य निशाने पर बैठा है या नहीं। वह मौन को सहन नहीं कर सकता। ऐसा कोई घातक शस्त्र नहीं है जो उसकी शस्त्रशाला में न हो, पर मौन वह मन्त्र है जिसके आगे उसकी सारी शक्ति विफल हो जाती है।


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~ मासिक वेतन पूर्णमासी का चाँद है। जो एक दिन दिखाई देता है और घटते ख़त्म हो जाता है।


~ लोग कहते हैं आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्या होता है ? इससे यह सिद्ध होता है कि हम जीवित है।


~ देह के भीतर इसीलिए आत्मा रखी गई है कि देह उसकी रक्षा करे। इसलिए नहीं कि उसका सर्वनाश कर दे।  


~ बड़े-बड़े महान संकल्प आवेश में ही जन्म लेते हैं।


~ निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।


~ बल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद कोई नहीं सुनता।


~ औरतों को रूप की निन्दा जितनी अप्रिय लगती है, उससे कहीं अधिक अप्रिय पुरूषों को अपने पेट की निन्दा लगती है। 


~ दु:खी हृदय दुखती हुई आँख है, जिसमें हवा से भी पीड़ा होती है।


~ दौलत से आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका सम्मान नहीं उसकी दौलत का सम्मान है।


~ संतोष-सेतु जब टूट जाता है तब इच्छा का बहाव अपरिमित हो जाता है।


~ जो शिक्षा प्रणाली लड़के लड़कियों को सामाजिक बुराई या अन्याय के खिलाफ लड़ना नहीं सिखाती उस शिक्षा प्रणाली में ज़रूर कोई न कोई बुनियादी खराबी है।


~ अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए, तो यह उससे कहीं ज्यादा अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।


~ साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है।


~ कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता, कर्तव्य पालन में ही चित्त की शांति है।


~ युवावस्था आवेशमय होती है, वह क्रोध से आग हो जाती है तो करुणा से पानी भी।


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~ प्रेम एक बीज है, जो एक बार जमकर फिर बड़ी मुश्किल से उखड़ता है।


~ किसी को भी दूसरों के श्रम पर मोटे होने का अधिकार नहीं हैं। उपजीवी होना, घोर लज्जा की बात है। कर्म करना प्राणिमात्र का धर्म है।


~ जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है। उनका सुख छीनने में नहीं।


~ डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है।


~ कार्यकुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है।


~ निर्धनता प्रकट करना निर्धन होने से अधिक दुखदायी होता है।


~ आदमी का सबसे बड़ा शत्रु उसका अहंकार है।


~ जिसकी आत्मा में बल नहीं,अभिमान नहीं, वह और चाहे कुछ हो, आदमी नहीं है।


~ आशा उत्साह की जननी है, आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है।


~ सोने और खाने का नाम जिंदगी नहीं है, आगे बढ़ते रहने की लगन का नाम जिंदगी है।


~ खुली हवा में चरित्र के भ्रष्ट होने की उससे कम संभावना है, जितना बन्द कमरे में।


~ यह जमाना चाटुकारिता और सलामी का है तुम विद्या के सागर बने बैठे रहो, कोई सेत भी न पूछेगा।


कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है, जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं


~ धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें, तो यह कोई महंगा सौदा नहीं है।


~ सत्य की एक चिंगारी, असत्य के पहाड़ को भस्म कर सकती है।


~ दूसरे के लिए कितना ही मरो, तो भी अपने नहीं होते। पानी तेल में कितना ही मिले, फिर भी अलग ही रहेगा।


~ माँ की 'ममता' और पिता की 'क्षमता' का अंदाज़ा लगा पाना असंभव है।


~ विचार और व्यवहार में सामंजस्य न होना ही धूर्तता है, मक्कारी है।


Thank you for reading Munshi Premchand quotes in hindi, मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार और वचन, Munshi Premchand thoughts in hindi, Quotes of Munshi Premchand in hindi.


Aasha karte hain ki aapko munshi premchand ki kahaniyon me se likhe gye ye famous quotes of munshi premchand pasand aaye honge. aapka sabse pasandida quotes kaun sa hai. kripya comment karke jarur batayen. aur saath hi motivational thoughts in hindi par munshi premchand ji ki tarah hi anya lekhakon ke quotes ko padhna na bhulen.


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