राम मनोहर लोहिया के सामाजिक एवं राजनीतिक विचार, Ram Manohar Lohia quotes in Hindi, Ram Manohar Lohia ke vichar, Ram Manohar Lohia Thoughts in hindi

Motivational thoughts in hindi पर आज हम पढ़ेंगे डॉ. राम मनोहर लोहिया के प्रेरक विचार, डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनमोल विचार, डॉ. राम मनोहर लोहिया के सामाजिक एवं राजनीतिक विचार, Dr. Ram Manohar Lohia quotes in Hindi, Dr. Ram Manohar Lohia ke vichar, Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi, Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi, राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार, राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार.


डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचार, Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi -:


~ जब भूख और जुल्म दोनों बढ़ जाते हैं तो चुनाव से पहले भी सरकारें बदली जा सकती है। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ अगर सड़कें खामोश हो जाएं तो संसद आवारा हो जाएगी। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ हमे अपना काम करते रहना  चाहिए, वहां भी जहाँ इसकी कद्र ना हो।


~ भारत में कौन राज करेगा ये तीन चीजों से तय होता है - ऊँची जाति, धन और ज्ञान। जिनके पास इनमे से कोई दो चीजें होती हैं वह शासन कर सकता है। ( Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi )


~ बलात्कार और वायदाखिलाफी को छोड़कर मर्द-औरत में हर रिश्ता जायज़ है। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करने पर इतिहास में हमेशा खून-खराबा हुआ है।


~ अंग्रेजी का इतना दबदबा कहीं नहीं है। इसीलिए भारत आजाद होते हुए भी गुलाम है।


~ मैं भारतीय इतिहास का ऐसा एक भी काल नहीं जानता जिसमें कट्टरपंथी हिंदू धर्म भारत में एकता या ख़ुशहाली ला सका हो। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ जैसे हाथ लुंज हो जाने पर सहारा देते हैं और तब हाथ काम करने लगता है। उसी तरह इन नब्बे फीसदी दबे हुए लोगों को सहारा देना होगा। उस समय तक जब तक कि हिन्दुस्तान में बराबरी न आ जाए। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ बिना रचनात्मक कार्य के सत्याग्रह, क्रिया के बिना लिखे वाक्य जैसा होता है।


~ मर्यादा केवल न करने की नहीं होती है, करने की भी होती है। बुरे की लकीर मत लांघो, लेकिन अच्छे की लकीर तक चहल पहल होनी चाहिए।


~ हम उस क्रांति के आकांक्षी हैं जिसमें क्रोध और करुणा का सम्मेलन हुआ हो। स्पर्धा और घृणा से प्राप्त क्रांति से हमें कोई उम्मीद नहीं है। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ इस देश की स्त्रियों का आदर्श सीता सावित्री नहीं, द्रौपदी होनी चाहिए। भारतीय नारी द्रौपदी जैसी हो, जिसने कभी भी किसी पुरुष से दिमागी हार नहीं खाई। नारी को गठरी के समान नहीं बल्कि इतना शक्तिशाली होना चाहिए कि वक्त पर पुरुष को गठरी बना अपने साथ ले चले। ( Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi )


~ अंग्रेजी का प्रयोग मौलिक सोच में अवरोध है, हीनता की भावनाओं का प्रजनक है और शिक्षित एवं अशिक्षित जनता के बीच की दूरी है। आइये, हम हिंदी की असल प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के लिए संगठित हो जाएं। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ सामाजिक परिवर्तन के बड़े काम जब शुरू होते हैं तो समाज के कुछ लोग गुस्से में बिल्कुल विरोधी हो जाते हैं। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ ज़िन्दा कौमें पाँच वर्ष इंतज़ार नहीं करती, वह किसी भी सरकार के गलत कदम का फौरन विरोध करती हैं। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ रोटी उलटते-पलटते रहो, ताकि वह ठीक से पके। एकतरफा सिक रही रोटी जल जाती है, पकती नहीं। वैसे ही सत्ता को भी उलटते रहो, ताकि जनता का भला हो सके। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ हमें समृद्धि बढानी है, कृषि का विस्तार करना है, फैक्ट्रियों की संख्या अधिक करनी है। लेकिन हमें सामूहिक सम्पत्ति बढाने के बारे में सोचना चाहिए। अगर हम निजी सम्पति के प्रति प्रेम को ख़त्म करने का प्रयास करें तो शायद हम भारत में एक नए समाजवाद की स्थापना कर पाएं। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ मृत्यु के बाद कम से कम सौ वर्षों तक प्रतीक्षा करो। सौ वर्षों के बीतने के बाद भी यदि लोग उस व्यक्ति को याद करें तब उसकी मूर्ति या स्मारक के बारे में सोचो। ( Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi )


~ औरत कोई भी हो। चाहे ऊंची जाति की या नीची जाति की। सबको मैं पिछड़ा समझता हूँ। औरत को हिंदुस्तान या दुनिया में दबा करके रखा गया है। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ जब हम किसी चीज का विरोध करते हैं तो क्रोध और करुणा का संतुलन होना चाहिए, अन्यथा अराजक स्थिति पैदा होगी।


~ प्रधानमंत्री का काम रोना-बिसूरना नहीं, देश का नेतृत्व करना और उसका हौसला बढ़ाना होता है। ( राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक विचार )


~ जाति अवसर को सीमित करती है। सीमित अवसर योग्यता को संकुचित कर देता है। संकुचित योग्यता अवसर को और आगे रोकती है। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ (इस्लामी दबाव के सामने) आत्मसमर्पण को सामंजस्य कहना कायरता है।


~ पेट है खाली मारे भूख, बंद करो दामो की लूट।


~ अर्थव्यवस्था में एक माध्यम के तौर पर अंग्रेजी का प्रयोग काम की उत्पादकता को घटाता है। शिक्षा में सीखने को कम करता है और रिसर्च को लगभग ख़त्म कर देता है। प्रशासन में क्षमता को घटाता है और असमानता तथा भ्रष्टाचार को बढ़ाता है। ( Dr. Ram Manohar Lohia Thoughts in Hindi )


~ हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा बने, कोई गुरेज नहीं। लेकिन प्रादेशिक भाषाओं के महत्व को भी प्राथमिकता देनी होगी तभी हिंदी का मूल सैद्धांतिक स्वरुप ले सकेगा।


~ चुनाव, प्रत्याशियों की हार-जीत से कहीं आगे, पार्टीयों द्वारा अपनी नीतियों व सिद्धांतों को जनता के बीच ले जाने के सुनहरे अवसर होते हैं। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ सच्चे लोकतंत्र की शक्ति सरकारों के उलट-पुलट में बसती है। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ ज्ञान और दर्शन से सब काम नहीं होता। ज्ञान और आदत, दोनों को ही सुधारने से मनुष्य सुधरता है।


~ भारत में असमानता सिर्फ आर्थिक नहीं है, यह सामाजिक भी है।


~ सामाजिक परिवर्तन के बडे़ काम जब प्रारंभ होते हैं, तो समाज के कुछ लोग आवेश में आकर इसका पूर्ण विरोध करते हैं। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ मैं मानकर चलता हूँ कि तानाशाही प्रणाली को दस, बीस या पचास मिलियन लोगों को खत्म करने का इरादा करना पड़ेगा। जब लोग नए समाजों और नई सभ्यताओं का निर्माण करने की बात सोचते हैं तब धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तियों से ज्यादा क्रूर कोई नहीं होता। क्योंकि ये धार्मिक और राजनीतिक व्यक्ति अपने आदर्श पर मोहित होते हैं और उस आदर्श को लाने के प्रयास में वे कोई भी कीमत देने को तैयार होते हैं। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ राजनीति एक अल्पकालिक धर्म है और धर्म दीर्घकालिक राजनीति। (Dr. ram manohar lohia political thought upsc in hindi)


~ वेद, आरण्यक, ब्राह्मण तथा उपनिषद के आधार पर हिन्दू धर्म में उदारवाद और कट्टरता की लड़ाई पिछले पांच हजार सालों से भी अधिक समय से चल रही है और उसका अंत अभी भी दिखाई नहीं पड़ता। लेकिन जहाँ तक बात रही मनुस्मृति को जलाने की तो जो किताब मनुष्य को मनुष्य न समझे उसे नष्ट होना ही चाहिए। 


~ जाति तोड़ने का सबसे अच्छा उपाय है, कथित उच्च और निम्न जातियों के बीच रोटी और बेटी का संबंध।


~ जात-पात भारतीय जीवन की सबसे सशक्त प्रथा रही है, यहाँ जीवन जाति की सीमाओं के भीतर ही चलता है।


~ यदि एक समाजवादी सरकार बल प्रयोग करे, जिसके परिणामस्वरूप कुछ लोगों की मौत हो जाए तो तो उसे शासन करने का कोई अधिकार नहीं है। ( राम मनोहर लोहिया के सामाजिक विचार )


~ चार हजार साल या उससे भी अधिक समय पहले कुछ हिंदुओं के कान में दूसरे हिंदुओं के द्वारा सीसा गला कर डाल दिया जाता था और उनकी जबान खींच ली जाती थी क्‍योंकि वर्ण व्यवस्था का नियम था कि कोई शूद्र वेदों को पढ़े या सुने नहीं।


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