रामप्रसाद बिस्मिल जी द्वारा रचित गुलामी मिटा दो कविता, Gulami Mita Do kavita, Gulami Mita Do poem in hindi by Ram Prasad Bismil

Motivational thoughts in hindi पर आज हम पढ़ेंगे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख सेनानी और कवि रामप्रसाद बिस्मिल जी द्वारा रचित गुलामी मिटा दो कविता, Gulami Mita Do kavita, Gulami Mita Do poem in hindi by Ram Prasad Bismil.

रामप्रसाद बिस्मिल द्वारा रचित गुलामी मिटा दो कविता, Gulami Mita Do poem -:


दुनिया से गुलामी का मैं नाम मिटा दूंगा,

एक बार ज़माने को आज़ाद बना दूँगा।


बेचारे गरीबों से नफरत है जिन्हें, एक दिन,

मैं उनकी अमरी को मिट्टी में मिला दूंगा।


यह फ़ज़ले-इलाही से आया है ज़माना वह,

दुनिया की दग़ाबाज़ी दुनिया से उठा दूंगा।


ऐ प्यारे ग़रीबों! घबराओ नहीं दिल में,

हक़ तुमको तुम्हारे, मैं दो दिन में दिला दूंगा।


बंदे हैं ख़ुदा के सब, हम सब ही बराबर हैं,

ज़र और मुफलिसी का झगड़ा ही मिटा दूंगा।


जो लोग गरीबों पर करते हैं सितम नाहक़,

गर दम है मेरा क़ायम, गिन-गिन के सजा दूंगा।


हिम्मत को ज़रा बांधो, डरते हो ग़रीबों क्यों?

शैतानी किले में अब मैं आग लगा दूंगा।


ऐ ‘सरयू’ यकीं रखना, है मेरा सुख़न सच्चा,

कहता हूं, जुबां से जो, अब करके दिखा दूंगा।


Thank you for reading रामप्रसाद बिस्मिल जी द्वारा रचित गुलामी मिटा दो कविता, Gulami Mita Do kavita, Gulami Mita Do poem in hindi by Ram Prasad Bismil.


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