अशफाक उल्ला खां द्वारा रचित कविता कस ली है कमर अब तो कुछ करके दिखाएंगे, Kas Li Hai Kamar kavita, Kas Li Hai Kamar poem in hindi by Ashfaqulla Khan

Motivational thoughts in hindi पर आज हम पढ़ेंगे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख सेनानी शहीद अशफाक उल्ला खां द्वारा रचित कविता कस ली है कमर अब तो कुछ करके दिखाएंगे, Kas Li Hai Kamar kavita, Kas Li Hai Kamar poem by Ashfaqulla Khan.


कस ली है कमर अब तो कुछ करके दिखाएंगे, Kas Li Hai Kamar poem by Ashfaqulla Khan -:


कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,

आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।


हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से,

तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे।


बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,

चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे।


परवा नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,

है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे।


उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे,

तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे।


सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका,

चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे।

दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं,

ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे।


मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए ज़ालिम,

आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

Thank you for reading शहीद अशफाक उल्ला खां द्वारा रचित कविता कस ली है कमर अब तो कुछ करके दिखाएंगे, Kas Li Hai Kamar kavita, Kas Li Hai Kamar poem by Ashfaqulla Khan.


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