रुके न तू कविता, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu Kavita, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu poem by Prasoon Joshi

Motivational thoughts in hindi पर आज हम पढ़ेंगे कवि प्रसून जोशी द्वारा रचित कविता रुके न तू, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu Kavita, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu poem by Prasoon Joshi.

रुके न तू कविता, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu poem by Prasoon Joshi -:


धरा हिला, गगन गुंजा

नदी बहा, पवन चला


विजय तेरी, विजय तेरी

ज्योति सी जल, जला


भुजा-भुजा, फड़क-फड़क

रक्त में धड़क-धड़क


धनुष उठा, प्रहार कर

तू सबसे पहला वार कर


अग्नि सी धधक-धधक

हिरन सी सजग-सजग


सिंह सी दहाड़ कर

शंख सी पुकार कर


रुके न तू, थके न तू

झुके न तू, थमे न तू


सदा चले, थके न तू

रुके न तू, झुके न तू


Thank you for reading रुके न तू कविता, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu Kavita, Ruke Na Tu Jhuke Na Tu poem by Prasoon Joshi.


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